Electric Vehicle new policy 2024 | भारत में इलेक्ट्रीक वाहनों के नियमों में बदलाव अब जल्द आने वाली है Tesla !

भारत सरकार ने शुक्रवार को Electric Vehicle new policy का ऐलान कर दिया। लेकिन ये इलेक्ट्रिक पॉलिसी टाटा मोटर्स और महिंदा एंड महिंदा जैसी घरेलू कंपनियों के लिए एक झटका है।
वहीं टेस्ला जैसी विदेशी कंपनी के लिए मोदी सरकार ने बेहद शानदार काम क्या है इस पॉलिसी में जो एक के लिए अच्छा और दूसरे के लिए खराब है।
आइयें समझने की कोशिश करते हैं या पहले जान लेते हैं कि इस पॉलिसी में क्या है ?

Electric Vehicle new policy 2024
Electric Vehicle new policy 2024

Electric Vehicle new policy खास बातें

इस नई पॉलिसी के नोटिफिकेशन के मुताबिक ऑटो कंपनियों को भारत में कम से कम 4150 करोड़ निवेश करना होगा।
इसमें मैक्सिमॅम इन्वेस्टमेंट की लिमिट कोई नहीं रखी गई है। कंपनी को 3 साल के अंदर भारत में अपनी इलेक्ट्रिक व्हीकल गाड़ियों का प्रोडक्शन शुरू करना होगा। साथ ही 5 साल के अंदर डोमेस्टिक वैल्यू अडिशन यानी DVA को 50% तक पहुंचाना होगा।

इलेक्ट्रिक व्हीकल बनाने में लोकल सोर्सिंग को बढ़ावा देना होगा, इसमें ऑटो कंपनियों को तीसरे साल में लोकल सोर्सिंग को 25% और पांचवे साल में 50% तक करना होगा।
इस नई पॉलिसी के तहत अब कंप्लीट बिल्ट यूनिट यानी CBU कार को भारत में इंपोर्ट करना आसान हो जाएगा, यानी टेस्ला का इंतजार अब खत्म हो गया है CBU से मतलब है पूरी तरह से बनी बनाई कार।

Tesla को कैसे होगा फायदा?

इसमें करीब 30 लाख रुपया की कीमत वाली कार को अगर भारत में इंपोर्ट करना है तो अब 15% की कस्टम ड्यूटी देनी होगी, जो कि पहले लगभग 32 लाख रुपए से कम कीमत वाली कारों के लिए 70% थी और इससे भी ज्यादा कीमत वाली कारों के लिए 100% कस्टम ड्यूटी की।
यानी साफ तौर पर टेस्ला जैसी कंपनियों के लिए भारत में अपनी इलेक्ट्रिक कारों को लाकर बेचना अब आसान हो जाएगा।

Electric Vehicle new policy 2024
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Electric Vehicle new policy terms.

हालांकि इसमें भी कुछ शर्तें रखी गई हैं जैसे ऑटो कंपनियों के लिए नई स्कीम सिर्फ 5 साल के लिए हैं, कंपनी 1 साल में सिर्फ 800 यूनिट भारत लाकर बेच सकेंगे।
5 साल में कुल 40,000 यूनिट्स ही भारत में बेची जा सकती हैं।
इंपोर्ट की गई कुल इलेक्ट्रिक गाड़ियों पर जितनी भी ड्यूटी की रियायत मिली है , उसकी भी एक सीमा होगी ।
वो कंपनी का कुल निवेश या फिर 6484 करोड़ रुपयें जो भी कम हो वो लागू होगा।
यानी अगर टेस्ला भारत में अपनी गाड़ियां बेचना चाहती है तो उसकी इजाजत उसे होगी, लेकिन शर्त ये है की उसे भारत में अपना प्लांट भी लगाना होगा और DVA या डोमेस्टिक वैल्यू अडिशन की शर्तों का पालन भी करना होगा।

Electric Vehicle new policy 2024
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तभी उसे अपनी कारों को भारत लाकर बेचने की ड्यूटी में रियायत दी जाएगी , लेकिन ये चीज़ सीधे तौर पर टाटा और महेंद्र पर असर डालेगी।

दरअसल ये दोनों घरेलू दिग्गज इलेक्ट्रिक व्हीकल आयात पर टैक्स छूट देने के खिलाफ़ थे, इन कंपनियों का मानना है कि टैक्स घटाने से ग्लोबल कंपनियों को महंगी EV कार भारत में लाकर आसानी से बेचने का मौका मिल जाएगा , और इससे भारतीय EV कंपनी की बिक्री प्रभावित होगी।
अब सही मायने में इसका क्या इम्पैक्ट पड़ेगा ये तो आने वाला वक्त बताएगा लेकिन हाँ अब आप टेस्ला की कारों को जल्द भारत की सड़कों पर दौड़ता देख पाएंगे।

Conclusion.

भारत सरकार ने अपनी इलेक्ट्रिक वाहनों के नीतियों में कुछ बदलाव किया है ताकिं भारत में इलेक्ट्रिक गाडियों को प्रोत्साहन मिल सके ।
Electric Vehicle new policy के अन्तर्गत कुछ विशेष शर्त के साथ कस्टम ड्यूटी को घटाया गया है ताकि विदेशी कम्पनियां भारत में आ सकें ।

आने वाला समय में विदेशी इलेक्ट्रिक गाड़िया जैसे कि टेस्ला भारत के सड़क पर दौड़ती हुई नजर आ सकती है ।

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